नई दिल्ली: भारत को खेल जगत में एक महाशक्ति बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय बैडमिंटन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद के नेतृत्व में बनी एक विशेष टास्क फोर्स ने खेल मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य भारत में कोचिंग (प्रशिक्षण) की पूरी व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार आधुनिक और बेहतर बनाना है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित रिपोर्ट है जिसे खेल मंत्रालय को सौंपा गया है। इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है, लेकिन इसके सुझावों पर अमल होने से भारतीय खेल जगत की तस्वीर बदल सकती है।
क्या हैं रिपोर्ट के मुख्य सुझाव?
1. नेशनल कोच एक्रिडिटेशन बोर्ड (NCAB) का गठन: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कोचों की शिक्षा, मान्यता और उनके काम की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड बनाया जाए। यह बोर्ड पूरे देश में कोचिंग के मानक तय करेगा ताकि हर जगह एक जैसी और उच्च गुणवत्ता वाली ट्रेनिंग मिल सके।
2. चार स्तरों वाली कोचिंग व्यवस्था (Pathway): समिति ने कोचों के लिए चार स्तरों का सुझाव दिया है: ग्रासरूट (जमीनी स्तर), इंटरमीडिएट (मध्यम), एलीट (उच्च स्तर) और नेशनल टीम कोच। इसमें पूर्व खिलाड़ियों, शारीरिक शिक्षा (पीई) शिक्षकों और खेल विज्ञान के छात्रों के लिए कोचिंग क्षेत्र में करियर बनाने के अलग-अलग रास्ते सुझाए गए हैं।
3. ‘प्रैक्टिस-फर्स्ट’ ट्रेनिंग मॉडल: कोचों की ट्रेनिंग में किताबी ज्ञान से ज्यादा मैदान पर अनुभव देने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 1800 घंटों की ट्रेनिंग में से लगभग 78% समय मैदान पर इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल प्रैक्टिस के लिए होना चाहिए।
4. कोचों के लिए भी होगा ‘TOPS’ (TOPS for Coaches): खिलाड़ियों की तरह ही अब बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कोचों को भी आर्थिक सहायता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके तहत उन्हें तकनीक का उपयोग करने और विदेश में प्रशिक्षण लेने के अवसर मिलेंगे।
5. 24/7 स्पोर्ट्स साइंस हेल्पलाइन: कोचों और खिलाड़ियों की मदद के लिए एक हेल्पलाइन सेवा का प्रस्ताव है, जहाँ स्पोर्ट्स साइंटिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट चौबीसों घंटे चोटों से बचाव और आहार से जुड़ी सलाह देंगे।
खेल फेडरेशनों और संगठनों के लिए सुझाव (हमारी राय)
भले ही यह रिपोर्ट अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन हमारे देश के खेल संघों (Federations) और क्षेत्रीय खेल संगठनों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। खेलो इंडिया न्यूज़ के माध्यम से हम निम्नलिखित सुझाव देते हैं:
- कोचिंग डेटाबेस तैयार करें: सभी स्पोर्ट्स फेडरेशन को अपने-अपने खेलों से जुड़े कोचों का एक आधुनिक डेटाबेस बनाना चाहिए और उनके प्रदर्शन को ट्रैक करना चाहिए।
- पूर्व खिलाड़ियों को जोड़ें: फेडरेशनों को चाहिए कि वे अपने खेल के पूर्व अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ियों को कोचिंग में आने के लिए प्रोत्साहित करें।
- तकनीक और विज्ञान को अपनाएं: स्थानीय स्तर के कोचों को भी स्पोर्ट्स साइंस और आधुनिक गैजेट्स के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे खिलाड़ियों को चोट मुक्त रख सकें।
- प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन: मंत्रालय के फैसले का इंतजार किए बिना, संस्थाओं को समय-समय पर अपने कोचों के लिए ‘रिफ्रेशर कोर्स’ आयोजित करने चाहिए ताकि वे नई तकनीकों से अपडेट रहें।
निष्कर्ष: पुलेला गोपीचंद समिति की यह रिपोर्ट भारत के ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को सच करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। यदि इन सुझावों को सही ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत न केवल मेडल जीतने वाले खिलाड़ी तैयार करेगा, बल्कि दुनिया को बेहतरीन कोच भी देगा।
खेल मंत्रालय की वेबसाइट पर यह रिपोर्ट मौजूद है, आप देख सकते हैं https://yas.nic.in/en/sports/report-task-force-unified-framework-development-coaching-ecosystem-india-december-2025
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