भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल कूटनीति को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हुए, केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने आज नई दिल्ली में न्यूजीलैंड के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच खेल सहयोग का विस्तार करना और एक-दूसरे के खेल इकोसिस्टम (Ecosystem) को मजबूत करना था।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों के 100 साल – ऐतिहासिक सफर
साल 2026 भारत और न्यूजीलैंड के खेल संबंधों के लिए बेहद खास है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच खेल रिश्तों का शताब्दी वर्ष (100 साल) है। इसकी शुरुआत 1926 में भारतीय सेना की हॉकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे से हुई थी। इसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, दोनों देशों ने खेल कूटनीति को और गहरा करने के लिए नई पहलों पर चर्चा की।
प्रमुख खेलों पर सहयोग की चर्चा
बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व खेल सचिव श्री हरि रंजन राव ने किया, जिसमें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और विभिन्न खेल संघों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। वहीं, न्यूजीलैंड की ओर से खेल और मनोरंजन राज्य मंत्री क्रिस बिशप, उच्चायुक्त पैट्रिक जॉन राटा और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रॉस टेलर जैसे दिग्गज मौजूद रहे।
दोनों देशों ने सहयोग के लिए कुछ खास खेलों की पहचान की है, जिनमें शामिल हैं:
- रग्बी
- रोइंग (नौकायन)
- कैनोइंग और सेलिंग
- एथलेटिक्स और साइक्लिंग
भारत-न्यूजीलैंड शताब्दी खेल सहयोग कार्यक्रम 2026
बैठक का मुख्य केंद्र ‘भारत-न्यूजीलैंड शताब्दी खेल सहयोग कार्यक्रम 2026’ रहा। यह एक साल तक चलने वाली पहल है, जिसे खेल विकास, हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके तहत दोनों देशों के शहरों में ‘स्पोर्ट्स एंड कल्चर वीक’ आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि खिलाड़ी और कोच एक-दूसरे की परंपराओं को समझ सकें।
ट्रेनिंग और कोच डेवलपमेंट पर ज़ोर
बैठक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए स्पोर्ट्स साइंस, डेटा एनालिटिक्स और जॉइंट ट्रेनिंग कैंप पर सहमति बनी। एक महत्वपूर्ण चर्चा यह रही कि न्यूजीलैंड के ‘कोच डेवलपमेंट फ्रेमवर्क’ को भारत के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NIS), पटियाला के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।
अगला कदम: जॉइंट वर्किंग ग्रुप का गठन
सहयोग के इन फैसलों को धरातल पर उतारने के लिए दोनों देशों ने एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (Joint Working Group) बनाने का फैसला किया है। यह ग्रुप समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करेगा और खेल विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा।
यह बैठक न केवल शताब्दी वर्ष का जश्न है, बल्कि दोनों देशों के एथलीटों और कोचों के लिए नए अवसर खोलने की एक ठोस प्रतिबद्धता भी है।

















